अयोध्या राम मंदिर। अयोध्या में बना दुनिया का सबसे बड़ा राम मंदिर। राम मंदिर को बनाने में बहुत से संघर्ष करने पड़े

एक ऐसा दिन जिसका इंतजार 500 सालों से किया जा रहा है वह बहुत ही स्पेशल दिन है सभी हिंदू लोगो के लिए । एक ऐसा दिन जिसके इंतजार में कई पीढ़ियां खत्म हो गई एक ऐसा दिन जिसके लिए कई लोगों ने लड़ाइयां करके अपनी जान दे दी । अयोध्या राम मंदिर की।

अयोध्या राम मंदिर की रोचक तथ्य

राम मंदिर का निर्माण 5 अगस्त 2020 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा भूमि पूजन में अनुष्ठान किया गया था और मंदिर का निर्माण आरंभ हुआ था । इस मंदिर को बनाने में 3 साल से भी ज्यादा का समय लगा। मंदिर की लागत की बात करें तो इस में अब तक 900 करोड़ रूपए लग चुके है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव संपत राय ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मानचित्र का वर्णन किया l उन्होंने वीडियो के माध्यम से पूरे मंदिर का नक्शा पेश किया । संपत राय ने बताया कि मंदिर का निर्माण 70 एकड़ भूमि के उत्तरी भाग पर किया जा रहा है। यह मंदिर अयोध्या में बन रही है। इसे राम जन्मभूमि या राम की जन्म भूमि के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर के उद्घाटन की तारीख और रामलाल के प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त काशी के पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने निकाला है। गणेश्वर शास्त्री ने ही काशी विश्वनाथ का मुहूर्त भी निकाला था। अयोध्या राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को होना तय हुआ है। इसी दिन इसी खास मुहूर्त में रामलला का प्राण प्रतिष्ठा भी होगा।

राम मंदिर के लिए आमंत्रित किए गए अभिनेता

22 जनवरी को होने वाले राम मंदिर की उद्घाटन के लिए कुछ मुख्य अभिनेता भी इसमें आमंत्रित हैं रजनीकांत ,कंगना रानाउत ,अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया के साथ-साथ क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली भी शामिल है। 22 जनवरी को होने वाले इस कार्यक्रम में बिजनेस मैन मुकेश अंबानी, ओर गौतम अदानी ओर हमारे रतन टाटा जी भी शामिल है।

अयोध्या राम मंदिर की कहानी

बाबर ने साल 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को तुड़वाया था और उसके जगह में मस्जिद बनवाया था राम जी के पुत्र कुश ने अयोध्या में राम मंदिर बनवाया था। अब कहां जाता है कि अयोध्या में राम जी के 3 हजार मंदिर थे। कहा जाता है कि उसके बाद कुछ मंदिरों के हालत बहुत खराब हो गए थे फिर टूटने उठने लगे थे इस दौरान उज्जैन के महाराज विक्रम आदित्य वहां आए और उन्होंने सारे मंदिरों को ठीक करवाया। फिर उसके बाद बाबर और इब्राहिम के बीच युद्ध होता है 1528 ई0 तक बाबर अयोध्या पहुंच जाती है इस दौरान बाबर के सेना ने राम मन्दिर को तोड़वाकर उसी जगह पर मस्जिद बनवाया फिर बाद में उसी मस्जिद को बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाने लगा । फिर हिंदुओं ने बहुत ही संघर्ष किया और मस्जिद के सामने अपना हिंदू का चबूतरा बनाया जिसमें सारे हिंदू जाकर पूजा करते थे फिर धीरे-धीरे उन्होंने लड़ाइयां लड़ी । जब 1947 को देश आजाद हुआ तो अयोध्या के हिंदुओं ने समझा कि अब मस्जिद उनके नाम हो गया है और वह बहुत ही खुश थे लेकिन फिर भी मस्जिद उन्हें नहीं मिली 23 दिसंबर 1949 को रात को मस्जिद के अंदर घंटियां बजाने की आवाज आने लगती है पता चलता है कि हिंदू वहां पर राम की पूजा करने लगे हैं हिंदू लोग दावा करते हैं कि यहां पर राम का मूर्ति अपने आप निकली है तो मुस्लिम पक्ष कहता है की मूर्ति को रात में चोरी छुपे रखा गया है। इतने में दोनों पक्ष के लोग वहां पर इकट्ठा हो जाते हैं बात नहीं बढ़ जाती है कि उसे समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी तक बातें पहुंच जाती है। फिर सभी लोग मिलकर कहते हैं कि वहां पर मूर्ति को हटाने के बजाय वहां पर बीच में जाली कर दिया जाए ताकि दोनों लोग हिंदू मुस्लिम दोनों जाकर पूजा कर सके । हम बहुत कोशिशें के बाद भी यहां पर हिंदुओं का अधिकार नहीं चल पाता है। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट या फैसला सुनाती है कि यह जमीन राम भूमि हिंदुओं को दे दी।

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