छत्तीस गढ़ के हसदेव जंगल को क्यों काटा जा रहा है । हसदेव जंगल खतरे में है।

छत्तीस गढ़ की सबसे बड़ी जंगल हसदेव जंगल है जिसको आज काटा जा रहा है इस जंगल में कई सारे पेड़ पौधे हैं और कई सारे जंगली जानवर हैं जिसे आज काटा जा रहा है इसे रोकने के लिए वहां के आदिवासियों ने हरदोई जंगल बचाव का आंदोलन किया है पर कोई भी सरकार की एक नहीं सुन रहा है।

जंगल बचाओ आंदोलन

छत्तीसगढ़ के सारे आदिवासियों ने मिलकर जंगल को बचाने के लिए सारे लोग इकट्ठे होकर जंगल बचाओ आंदोलन कर रहे हैं लेकिन पेड़ काटने वालों ने उन्हें डंडे से मार मार कर भगा दे रहे हैं कई आदिवासियों का घर भी गुजर गया है और कई जानवर बेघर हो गए हैं अगर वहां के सारे पेड़ काट दिए जाएंगे तो ऑक्सीजन की भी कमी होगी और फ्यूचर में बहुत ही दिक्कत आएगी। जंगल को बचाने के लिए सारे लोग आंदोलन पर आंदोलन किया जा रहे हैं और सोशल मीडिया कभी भरपुरी से उपयोग किया जा रहा है लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है |वासुदेव अरण्य छत्तीसगढ़ झारखंड और उड़ीसा से लगा हुआ हरा भरा जंगल है इस इस इलाके का फेफड़ा कहा जाता है यह इलाका सदियों से रहने वाले आदिवासियों का घर है और इसी को बचाने की गुहार लिए वासुदेव अरुण बचाव संघर्ष समिति से जुड़े उमेश्वर सिंह आरमो दिल्ली पहुंचे । वे बताते हैं की हम लोग का इलाका आदिवासी बहुल है ।

हसदेव जंगल को क्यों काटा जा रहा है

हसदेव जंगल हमारे छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में है यह जंगल छत्तीसगढ़ के क्षेत्र में सबसे बड़ा जंगल है यह जंगल छत्तीसगढ़ में 137 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस जंगल को काटने का उद्देश्य एक ही है कोयला खदान खोलने के लिए जंगल को काटा जा रहा है। इस जंगल को प्रधानमंत्री मोदी जी ने अदानी ग्रुप को सौंप दिया है अदानी ग्रुप वाले हैं इस जंगल की कटाई करके उसमें से कोयला निकाला जाएगा।इस जंगल में हजारों पेड़ मौजूद है और कई आदिवासियों का घर है जिसे आज काटा जा रहा है हजारों जानवरों का घर उजाड़ रहा है और कई आदिवासियों का भी घर उजाला जा रहा है । अब तक 30000 से भी ज्यादा पेड़ों को काटा जा चुका है। और कई लाखों पेड़ों को भी काटने की तैयारी हो रही है।

हसदेव जंगल से कोयला निकालने की मांग की

एसोसिएशन आफ पावर प्रोड्यूसर APP ने नवंबर 2021 में कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की की भारत के सबसे घने जंगलों में थे एक में स्थित दो कोयला ब्लॉक को नीलामी के लिए उपलब्ध कराया जाए तब चर्चा गर्म थी कि देश में कोयले की कमी होने वाली है और APP ने अपने पत्र में कहा कि ऐसी स्थिति में से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए । लेकिन यह लॉबिंग शुरू से ही App के सदस्य अदानी समूह को लाभ पहुंचाने के लिए हो रही थी। जिन दो ब्लाकों के लिए संगठन ने पैरवी की उनमें से एक मध्य प्रदेश के सिंगरौली कोयला क्षेत्र में स्थित है। यह एक थर्मल पावर प्लांट के निकट है जिसका अधिग्रहण अदानी समूह ने मार्च 2022 में किया था दूसरा छत्तीसगढ़ के प्राचीन हसदेव के जंगलों में स्थित है और इसके आसपास के ब्लॉक में अदानी समूह द्वारा खनन किया जाता है। मोदी सरकार ने भी जब 2022 में खाना ब्लॉक को की बिक्री के लिए एक सूची जारी की तो कहा कि जिन जंगलों में ग्रीन कर 40% से अधिक है उन्हें नीलामी में नहीं रखा जाएगा हालांकि अब वह इस निर्णय पर नहीं टिके हैं अगस्त 2023 में अदानी समूह को महान पावर प्लांट का विस्तार करने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी मिली।

रायपुर से Cm विष्णु देव का बयान सामने आया है

हसदेव के आंदोलन पर कम विष्णु देव का कहना है कि वन कटाई की अनुमति जब कांग्रेस सरकार थी तब दी गई है उनका कहना है कि जब कांग्रेस की सरकार थी तब ही वन कटाई की अनुमति दी गई थी इसी वजह से पेड़ों की कटाई फिर से शुरू हो गई है और वहां पर आंदोलन भी काफी जोरों से चल रही है।

जंगली पेड़ बचाओ और जिंदगी बचाओ

छत्तीसगढ़ में जो जंगल है उसे भारत का फेफड़ा भी कहा जाता है जिसकी आज कटाई जोरों से जारी है और पेड़ कट जाएंगे तो पर्यावरण को भी बहुत ही भारी नुकसान होगा लेकिन सरकारों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। पेड़ों की कटाई से आदिवासी बहुत ही ज्यादा गुस्से में है और वह काफी दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। वहां के आदिवासियों का कहना है कि वह जंगल नहीं अपनी जिंदगी बचा रहे हैं। इस जंगल में कई सारे जानवर भी बचे हुए हैं और यह जंगल 1500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। और यहां पर 3000 किस्म के दुर्लभ औषधीय पेड़ पौधे पाए जाते हैं। इसे भारत का फेफड़ा भी कहा जाता है और यह भारी मात्रा में ऑक्सीजन वातावरण में छोड़ना है। और इस जंगल से आदिवासी परिवार को सालाना 60 से 17000 के आमदनी प्राप्त होती है। और इसमें करीब 5 अब टन कोयला दबा हुआ है। सरकार ने वहां के दबे कोयले को निकालने के आदेश दिया जिससे भारी मात्रा में वहां के पेड़ काटे जा रहे हैं और वातावरण को भी नुकसान हो रहा है।

राजस्थान गवर्नमेंट को कॉल मीनिंग का ठेका मिला है

इस पूरे विवाद में बहुत सारे सरकारी भी शामिल हैं इस विवाद में केंद्र सरकार राजस्थान सरकार और अडानी ग्रुप भी शामिल हैं इस जंगल में कॉल मीनिंग का जिम्मा राजस्थान सरकार ने अदानी ग्रुप को दिया है।

wildlife institute of India के अनुसार कोयला खदान हसदेव फॉरेस्ट रीजन में नहीं खोली जानी चाहिए और इस पूरे इलाके को नो गो जॉन डिक्लेयर कर देना चाहिए। हिंदी में काग और ऐसा ही पेड़ों की कटाई चलते रहा तो बहुत सारे वन्य जीव विलुप्त होने के कगार पर आ जाएगी बहुत से जीव विलुप्त हो जाएंगे।

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