बजट 2024: बजट से जुड़े भारी भरकम शब्दों का यह है मतलब इसे जान गया तो बजट में समझना होगा आसान

बजट 2024 का मतलब पढ़े लिखे आदमी के लिए समझाना टेढ़ी खीर होता है। बजट शब्द फ्रेंच भाषा के शब्द बोजेत (Bougette) से बना है इसका अर्थ होता है। छोटा बैग फ्रेंच भाषा में यह शब्द लैटिन शब्द बुल्गा से लिया गया है इसका अर्थ है चमड़े का थैला।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को साल 2024 का अंतिम बजट पेश करेंगी। बजट में ऐसी कई बातों और शब्दों का उल्लेख होता है जिन्हें हम आमतौर पर सुनते हैं समझने का एहसास भी होता है लेकिन उसकी परिभाषा और व्याख्या के बारे में हमें पता नहीं होता लिए बजट में इस्तेमाल होने वाले ऐसे ही शब्दों के मायने साल वह आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं।

बजट क्या है?

बजट का मतलब पढ़े लिखे आदमी के लिए भी समझना टेढ़ी खीर होता है। बजट शब्द फ्रेंच भाषा के शब्द बोजेत(Bougte)से बना है। इसका अर्थ होता है छोटा बैग फ्रेंच भाषा में यह शब्द लैटिन शब्द बुलगा से लिया गया है इसका अर्थ है चमड़े का थैला प्राचीन समय में बड़े व्यापारी अपने सारे मौद्रिक दस्तावेज एक थैली में रखते थे इसी तरह धीरे-धीरे इस शब्द का प्रयोग संसाधनों को जताने के लिए किए गए हिसाब किताब से जुड़ गया इस तरह सरकारों के साल भर के आर्थिक बही खाते का नाम मिला बजट सरकार द्वारा देश का आय व्यय लेखा-जोखा पेश करने की शुरुआत ब्रिटेन से हुई थी। ब्रिटेन के वित्त मंत्री सांसद में जब आए व्यय का लेखा-जोखा पेश करने आते हैं तो संबद्ध दस्तावेज चमड़े के एक लाल बाग में रखकर लाते हैं उसे बैग को फ्रेंच में बजेटी कहा जाता है जो अंग्रेजी में भाषांतर करते समय बजट हो गया है।

राजकोषीय घाटा:

सरकार के कुल आय और व्यय में अंतर को आर्थिक शब्दावली में राजकोषीय घाटा कहा जाता है इससे इस बात की जानकारी होती है कि सरकार को कम कर चलाने के लिए कितने उधर की जरूरत होगी कुल राजस्व का हिसाब किताब लगाने में उधार को शामिल नहीं किया जाता। यानी सरकार के खर्च और आमदनी के अंतर को वित्तीय घाटा या बजट घाटा कहा जाता है।

चालू खाता घाटा:

जब किसी देश की वस्तुओं और ट्रांसफर का आयात इनके निर्यात से ज्यादा हो जाता है तब चालू खाता घाटा की स्थिति पैदा होता है यानी जब भारत में बनी चीजों और सेवाओं का बाहर निर्यात होता है तो इससे भुगतान हासिल होता है दूसरी ओर जब कोई भी वस्तु या सर्विस आयत की जाती है तो उसकी कीमत चुकानी पड़ती है इस तरह देश में प्राप्त भुगतान और बाहरी देशों को चुकाएंगे कीमतों में जो अंतर आता है वह चालू खाता घाटा कहलाता है।

सरकारी राजस्व व व्यय :

सरकारी राजस्व सरकार को उसके सभी स्रोतों से होने वाली आमदनी होता है इसके विपरीत सरकार जिन-जिन मादो में खर्च करती है। मुझे सरकारी व्यय कहते हैं। यह सरकार की वित्तीय नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

बजट आकलन:

वित्त मंत्री संसद में बजट प्रस्ताव रखते हुए विभिन्न तरह के कर और शुल्क के माध्यम से होने वाली आमदनी और योजनाओं व अन्य तरह के खर्चों का लेख पेश करती है उसे आमतौर पर बजट आकलन कहा जाता है।

वित्त विधेयक:

इस विधेयक के माध्यम से ही आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सरकारी आमदनी बढ़ाने के विचार से नए करो आदि का प्रस्ताव करते हैं इसके साथ ही वित्त विधेयक में मौजूद कर प्रणाली में किसी तरह का संशोधन आदि को प्रस्तावित किया जाता है संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाता है।

राजस्व सरप्लस:

यदि राजस्व प्राप्तियां राजस्व खर्च से अधिक है तो या अंतर राजस्व सर प्लस की श्रेणी में होगा।

बिनियोग विधेयक:

विनियोग विधेयक का सीधा अर्थ यह है कि तमाम तरह के उपाय के बावजूद सरकारी खर्चे पूरे करने के लिए सरकार की कमाई ना काफी है और सरकार को इस मध्य के खर्च पूरे करने के लिए संचित निधि से धन की जरूरत है एक तरह से वित्त मंत्री इस विधेयक के माध्यम से संसद से संचित निधि से धन निकालने की अनुमति मांगते हैं।

पूंजी बजट :

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सरकारी आमदनी का ब्यावर पेश करते हुए उनमें पूंजीगत आए भी शामिल होती है यानी इसमें सरकार द्वारा रिजर्व बैंक और विदेशी बैंक से लिए जाने वाले कर्ज ट्रेजरी चालान ऑन की बिक्री से होने वाली आय के साथ ही पूर्व में राज्यों को दिए गए कर्जन की वसूली से आए धन का हिसाब किताब भी इस पूंजी बजट का हिस्सा है।

संशोधित आकलन:

यह बजट में खर्चों के पूर्वानुमान और वास्तविक खर्चों के अंतर का ब्योरा है।

पूंजी भुगतान:

सरकार को किसी तरह की परिसंपत्ति खरीदने के लिए जो भुगतान देना होता है वह इस श्रेणी में आता है केंद्र सरकार द्वारा राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक उपक्रमों को मंजूर कर्ज और अग्रिम राशि भी पूंजी खर्च के रूप में जाना जाता है

अनुदान मांग:

संचित कोष से मांगे ज्ञान धन के खर्चों का अनुमानित लेखा-जोखा ही अनुदान मांग है।

योजना खर्च:

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता के अलावा केंद्र सरकार की योजनाओं पर होने वाले सभी तरह के खर्चों को इसमें शामिल किया जाता है।

गैर योजना खर्च:

इसमें ब्याज के अदायगी रक्षा, सब्सिडी, डाक घाट, पुलिस, पेंशन, आर्थिक सेवाएं, सार्वजनिक उपक्रम ऑन को दिए जाने वाले कर्ज और राज्यों केंद्र शासित

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